गाल आगे बड़ा दीजिये, थप्पड़ आने वाला है
स्वर में पावक यदि नहीं, वृथा वंदन है वीरता नहीं तो सभी विनय क्रंदन है सर पर जिसके असिघात, रक्त चन्दन हैभ्रामरी उसी का करती अभिनन्दन है दानवी रक्त से सभी पाप धुलते है ऊँची मनुष्यता के पथ भी खुलते है श्री रामधारी सिंह "दिनकर" जी की...
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Rahul kundra
समाज व राजनीती
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[17 Feb 2010 00:41 AM]



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