होली है भई होली है

duniya meri nazar se 26 तारीख को प्रणव बाबु ने आम आदमी के अरमानो में आग लगा कर अपनी होली तो माना ली अब आप अपनी आँख से बहते हुए अश्को से खुद को मत भिओगिये आज एक दिन आपने गम भूल कर ख़ुशी मानिये (हलाकि मै मानता हूँ की ये थोडा मुश्किल है ) फिर भी आपको ख़ुशी मिले  मै यानि... [पूरी पोस्ट]
writer Rahul kundra

समाज व राजनीती

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[01 Mar 2010 00:19 AM]

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