दोहा गीत: धरती ने हरियाली ओढी --संजीव 'सलिल'
धरती ने हरियाली ओढी,मनहर किया सिंगार.,दिल पर लोटा सांपहो गया सूरज तप्त अंगार...*नेह नर्मदा तीर हुलसकरबतला रहा पलाश.आया है ऋतुराज काटनेशीत काल के पाश.गौरा बौराकर बौरा कीकरती है मनुहार.धरती ने हरियाली ओढी,मनहर किया सिंगार.*निज स्वार्थों के वशीभूत हो छले न...
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आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल'
samyik hindi kavita
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[13 Feb 2010 14:11 PM]



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