गीत : सबको हक है जीने का --संजीव 'सलिल'
गीत : संजीव 'सलिल' सबको हक है जीने का,चुल्लू-चुल्लू पीने का.....*जिसने पाई श्वास यहाँ,उसने पाई प्यास यहाँ. चाह रचा ले रास यहाँ.हर दिन हो मधुमास यहाँ. आह न हो, हो हास यहाँ.आम नहीं हो खास यहाँ. जो चाहा वह पा जानाहै सौभाग्य नगीने का.....*कोई अधूरी आस न...
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आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल'
samyik hindi kavita
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[23 Feb 2010 07:20 AM]



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