सरेराह चलते चलते ...
हर पल न जाने कितनी बातें मन के अन्दर ही कहीं दफ़न हो जाती है कभी जुबान नही मिल पाती कभी जस्बातअभी थोड़ी देर पहले जंगले से झांकते हुए मैंने कबूतर के एक जोड़े को देखा ...कभी लड़ते और फडफडा कर एक दुसरे से अलग हो जाते फिर पास आते और न जाने अपनी...
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himani
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[18 Feb 2010 07:41 AM]



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