अब हम बड़े हो गए है
........बात उन दिनों की है जब....कब पढ़ते पढ़ते आँख लग जाती थी पता ही नही चलता था.......और ये किस्सा आज का है की नींद नही आती तो आधी रात तक किताब पढ़ते पढ़ते ही गुजर जाती है ....उन दिनों ठंडी हवाओ से इतना डर लगता था की जुराब और टोपी पहन कर ही बाहर...
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himani
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[19 Feb 2010 07:45 AM]



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