अपने अपने हिस्से की धूप

सलाम करता चलूं हम समेटे अपने अपने हिस्से की धूपअपने हक की बारिशेंलगाये फांट बगीचे में उगेआम और अमरूद के पेडों काअपने अपने हिस्से काआटा गूंथे, पूडी तलेचवन्नी डाले अपने अपने गुल्लक मेंएक बिस्तर पर बांटे करवटों कोअपने अपने हिस्से की चांदनी से रौशन होअगल अलग ख्वाहिश पे... [पूरी पोस्ट]
writer ritu raj
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[20 Feb 2010 01:10 AM]

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