न देव न देवदास.

सलाम करता चलूं किनारे किनारे हीमोहब्ब्त का दर्द गुजर गयाहौले-हौले, आहिस्ते, बडे धीमेटीस उठी भी तो चवन्नी छापइश्क की मोटी लकीरकब साईज़ ज़ीरो हो गईपता ही न चलापाकेट में एक फ़ोटू तक नहींमेहबूब की.सब कुछ बडे सस्ते हुआनदी उस पार जाने काकभी मौका ही नहीं मिला.कई दफ़े आसुओं... [पूरी पोस्ट]
writer ritu raj
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[13 Feb 2010 23:31 PM]

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