कुम्भ नहा आये..
मेरे मेला विभाग के दोस्त कुम्भ नहा आये। गए थे विज्ञापन को समेटन लगे आशीष ! गलत भी क्या है। गप श मैं मालूम चला की मेले मैं अनेक तरह के लोग थे। सबसे पहेल वह जो आर्थिक पुण्य मैं लगे थे जैसे की हम। फिर वह जो इंतजाम मैं लगे थे , अधिकारी महोदय।( कल्लन कह रहे...
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rajkumar jha
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[27 Feb 2010 23:54 PM]



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