लफ्ज़ सीते हैं

गीत-ग़ज़ल न गम किया , न गुमान कियायही तरीका है जीने का , जिसने आराम दियाचाहा कि गम से दूरी बरकरार रहेये वो शय है हर कदम , जिसका दीदार कियाहम खलिश को भी रखते हैं अपनी निगरानी मेंसुनते हैं कई बार वजूद इसने भी तार-तार कियासहलाता है कभी वक़्त भी थपकियाँ दे दे करघूँट... [पूरी पोस्ट]
writer शारदा अरोरा
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[20 Feb 2010 01:37 AM]

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