लफ्ज़ सीते हैं
न गम किया , न गुमान कियायही तरीका है जीने का , जिसने आराम दियाचाहा कि गम से दूरी बरकरार रहेये वो शय है हर कदम , जिसका दीदार कियाहम खलिश को भी रखते हैं अपनी निगरानी मेंसुनते हैं कई बार वजूद इसने भी तार-तार कियासहलाता है कभी वक़्त भी थपकियाँ दे दे करघूँट...
[पूरी पोस्ट]
शारदा अरोरा
5
0
0
0
0
[20 Feb 2010 01:37 AM]



Shuffle








