रँग आ गया फागुन की बयारों का
रँग आ गया फागुन की बयारों कामस्ती के ढोल नगाड़ों काहोली का , तन-मन रँग के गीत गाने का रँग होली का है अबीर-गुलालरँग जीवन का है यही , हँसी-खेल-खुशीबहाना है चलने का , दम भरने कारँग आ गया फागुन की बयारों का
थिरकन भी है धड़कन का जवाबथाप ढोलक की नहीं , कदम...
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शारदा अरोरा
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[27 Feb 2010 13:28 PM]



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