समझो के शब हुई

गीत-ग़ज़ल आये हैं बीमार बीमार का हाल पूछनेकोई और भी है मेरे जैसा , तसल्ली हुईआहट हुई राह में देख कर गुलाब कोसेहरे में गुंथता ये , ख़्वाबों से बात हुईकोई गुजरा था कह देते हैं निशाँ सब कुछछेड़े जो तराने तो या खुदा दर्द हुआ या ग़ज़ल हुईजितना है तेरा मन उदास , दर्द भी... [पूरी पोस्ट]
writer शारदा अरोरा
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[06 Mar 2010 05:48 AM]

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