1411- बाघों के नाम

नई सोच आज के दौर में जंगल उदास हैंऔर वो लड़की जो बाघ की खाल से बना फर पहनकरशीशे में देख मुस्कुरा रही हैहमें जंगली सी दिखती है।पर ये उस दौर की बात हैजब जंगल उतने जंगली नहीं थेन ही आदमी उतना शहरी।जब एक दहाड़ सुनाई देने परअक्सर कहते थे गांव के लोगकि बाघ आ गया।हम... [पूरी पोस्ट]
writer उमेश पंत

कविता

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[17 Feb 2010 14:58 PM]

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