हम तो ऐसे ही कहेंगे जी "गज्जल"
हम तो ऐसे ही कहेंगे जी "गज्जल" (होली के अवसर पर विशेष ) टोकरी ये भर गई , कविताओं सेसुनलो फिरता हूँ गधे-सा लाद करदेर से बैठा हूँ इस उम्मीद मेंमैं सुनाऊं और तू इरशाद करएक दो मजबूर हो कह देंगे "वाह"और सब सोचेंगे "मत बकवाद" करतू किये जा कर्म गज्ज्लें...
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योगेश स्वप्न
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[27 Feb 2010 06:50 AM]



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