संस्कार, सभ्यता, बाजारीकरण, नैतिकता की ठेकेदारी, और वैलेंटाइन डे के बहाने एक सच

मैनें आहुति बनकर देखा.. अपने गिरिजेश जी तो फगुनाहट में सराबोर हैं, उन्हें बखूबी साथ मिल रहा है अमरेन्द्र भाई का, तथा हिमांशु भाई का। कौन आचारज है, कौन चेला, कुछ भी क्लियराय नहीं रहा। जो भी हो, यह मंडली लगभग हर दूसरे ब्लॉग पर जोगीरा सरररर करते दिख जा रही है। ब्लॉग जगत का आपसी... [पूरी पोस्ट]
writer कार्तिकेय मिश्र (Kartikeya Mishra)

शुभकामना

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[14 Feb 2010 11:45 AM]

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