ये मुझे क्या हो गया ....

कविताओं के मन से किसी अनजाने से तेरे बारे में बात करना ;और जब वो कहे की ये जानां कौन है यार ...किसी सुबह अपने बगल में तेरा चेहरा ढूँढना ;और फिर हँसना की मैं पागल हो गया हूँ ...किसी शाम को उतरते हुए सूरज से ये कहना की, तेरे चेहरे पर मेरे नाम की किरण बिखराए...किसी रात को... [पूरी पोस्ट]
writer Vijay Kumar Sappatti
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[11 Feb 2010 00:45 AM]

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