एक पुरानी दोस्त को आखिरी सलाम!
अब कभी नही बैठेंगे हम ऐसे मेरे दोस्तआज आख़िरी सिगरेट एश ट्रे में डालकर बुझा चुका हूं… वादा किया था ख़ुद से कि उस दिन ही यह कविता पोस्ट करुंगा तो कर रहा हूं। कोई उपदेश नहीं। इसे छोड़ना मेरे लिये किसी ऐसे दोस्त को छोड़ना है जिससे कोई उम्मीद नहीं बची है पर...
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अशोक कुमार पाण्डेय
कविता
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[18 Feb 2010 12:19 PM]



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