वह राम ही था
जिस पुरुषोतम ने अजन्मा होकर भी महाभाग दशरथ के यहाँ जन्म लिया -जिसकी सेवा के लिए स्वर्ग के सुख भोगकर अनेक देवता इस पृथ्वी पर मनुष्य के रूप में अवतरित हुए थे -जिसके द्वार पर सदैव भगवान् शंकर योगी का भेष धारण कर केवल उसका दर्शन करने आते थे - वह राम ही था...
[पूरी पोस्ट]
Ratan Singh Shekhawat
स्व.श्री तनसिंहजी की कलम से
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[16 Feb 2010 21:37 PM]



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