वह राम ही था –२
भाग -१ से आगे ..... जिसने रावण जैसे आततायी को भी मारने से पहले उसे सुधरने का मौका दिया और युद्ध टालने की हर संभव और उचित चेष्टा की - लक्ष्मण के मूर्छित होने पर जिस भाई की आँखों में प्रेमाश्रुओं की अविरल धारा बहने लगी और जो संयोग-वियोग रहित होकर भी साधारण...
[पूरी पोस्ट]
Ratan Singh Shekhawat
स्व.श्री तनसिंहजी की कलम से
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[19 Feb 2010 08:42 AM]



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