उत्तर भड़ किंवाड़
काक नदी की पतली धारा किनारों से विरक्त सी होकर धीरे धीरे सरक रही थी | आसमान ऊपर चुपचाप पहरा दे रहा था और नीचे लुद्रवा देश की धरती , जिसे आजकल जैसलमेर कहा जाता है , प्रभात काल में खूंटी तानकर सो रही थी | नदी के किनारे से कुछ दूरी पर लुद्रवे का प्राचीन...
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Ratan Singh Shekhawat
स्व.श्री तनसिंहजी की कलम से
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[05 Mar 2010 09:57 AM]



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