धर्म न हिन्दू है, न जैन, न इस्लाम और न इसाई
धर्म का एकमात्र कार्य है--जीवनमूल्यों को ऊँचा उठाना। यदि धर्म के अभ्यास से जीवनमूल्य ऊँचे नहीं उठते,हमारा लोक व्यवहार नहीं सुधरता, हम अपने लिए तथा औरों के लिए मंगलमय जीवन नहीं जी सकते तो ऎसा धर्म फिर किस काम का? धर्म इसलिए है कि हमारे पारिवारिक...
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पं.डी.के.शर्मा"वत्स"
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[11 Feb 2010 14:46 PM]



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