धत्त तसलीमा !
तसलीमा जो हैं सो बचपन से ही अत्यंत षड्यंत्रकारी प्रवृत्ति की रहीं। उन्होंने ख़ुद ही अपने चाचा-मामा को उकसाया कि वे उनसे दुराचार करें या इसकी कोशिश करें ताकि बड़ी होकर वे इस पर लिख कर पैसा कमा सकें।वे इतनी बेवकूफ़ रहीं कि क्रांति और बदलाव की कुसंगत में पड़...
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sanjaygrover
दोहरे मानदण्ड
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[03 Mar 2010 00:12 AM]



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