वो झुकी निगाह
उस झुकी निगाह को, इंकार कैसे करते हमयाद रही है जन्म भर, फिर वो झुकी निगाहजब्त कर के चाह को, आह भर कर रह गयेमर गये उस लम्हे में, न कभी उठी निगाहजमाना भर हमदर्द था, दर्द ना वो कभी मिटाजिसने हमको देखा बोला, कैसी लुटी निगाह?सिसकियां जीते रहे, हिचकियों में...
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Rajey Sha
गजल
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[13 Feb 2010 05:24 AM]



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