मेरी आरजू...कमीनी। मेरे ख्वाब भी....कमीने....।
एक छोटा सा तथ्य आदमी के चरित्र का सारा बखिया उधेड़ देता है। आज तक के मानवीय इतिहास में हमने देखा है कि कोई भी देश अपने सर्वश्रेष्ठ महानगरों में आधुनिकता और कृत्रिम सभ्यता ही नहीं, उस काल्पनिक नर्क को भी यथार्थ में पालता है जो कि कई धर्मों में सविस्तार...
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Rajey Sha
अपरिहार्य
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[23 Feb 2010 03:49 AM]



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