तुमसे बातचीत
मैंने तो खूब चाहा थाकि आज रात... चांद से बोल-चाल बंद रखूं।पर, तुमने आज भी चेहरा छिपा रखा थाबेजुबान शब्दों की खामोशी में।मेरे जलते हुए सीने मेंसूरज रोज डूबता है।और हर रात मैं -सुबह तक चांद से बातें करता हूं।कि, कभी तो तुम्हारा चेहरा समझ आयेगाऔर उसके कहे...
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Rajey Sha
मुक्तक
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[03 Mar 2010 08:58 AM]



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