सलीपले, सलीपले, डोगणी

मुसाफिर हूँ यारों 1. एक बेर जाट विदेश तै आया, अर आके बोल्या –“मैं एक रिसर्च करके आया सूं।” सारे डाक्टर कट्ठे कर लिये अर कहण लाग्या के आ ज्याओ, थमनै दिखाऊं। फेर एक काकरोच की टांग तोड के मेज पै छोड दिया अर उस तै बोल्या –“चल भाई चल।”काकरोच चल पडा।फेर दूसरी टांग तोड दी। वो... [पूरी पोस्ट]
writer नीरज मुसाफिर जाट

मूड फ्रेश

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[21 Feb 2010 21:30 PM]

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