सच बोलने पर इनाम नहीं होता-हिन्दी व्यंग्य शायरी (sach bolen par inam-hindi vyangya shayri)
इंसान की हर अदा पर मिलते हैंपर सच बोलने पर कोई इनाम नहीं होता।कितना भी हो जाये कोई अमीर,पीछा नहीं छोड़ता उसका जमीर,कैसे दे सकते हैं इनाम, उस शख्स कोबोलता है हमेशा सच जो,खड़ी है दौलत की इमारत उनकी झूठ परचाटुकारों को लेते हैं, अपनी बाहों में भरक्योंकि सच...
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दीपक भारतदीप
शायरी
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[15 Feb 2010 10:58 AM]



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