देशभक्ति का व्यापार-हिन्दी व्यंग्य कवितायें (deshbhakti ka vyapar-hindi comic poem)
आदर्श पुरुषों ने अपनी दरबार मेंदेशभक्ति का नारा बड़े तामझाम के साथ सजाया।बाजार को बेचनी थी मोमबत्तियोंशहीदों के नाम पर,इसलिये प्रचारकों से नारे को संगीत देने के लियेशोक संगीत भी बजवाया।भेजे आदर्श पुरुषों के नाम से रुपयों से भरे लिफाफेजिनकी समाज सेवा से आम...
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दीपक भारतदीप
sher
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[19 Feb 2010 12:19 PM]



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