पेशा है अमीरों को गलियां देना-हिन्दी व्यंग्य शायरी (trede of welfare-hindi satire poem)
नारे लगाकर हुई कमाई सेवाद चलाये जाते हैं,आतंक वाले उदार दिखने की कोशिश करतेतो लोगों की तरक्की के लिये जूझने वालेहिंसा को जरूरी बताये जाते हैं।इस अर्थयुग में जमाने का मुफ्त में भला करने वालेकहां से आयेंगे,ख्याल हैं जिनके पुरानी किताबों के गुलामकब...
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दीपक भारतदीप
sher
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[23 Feb 2010 10:50 AM]



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