ज़रदारी - सामान सौ बरस का, पल की खबर नहीं

झूठा सच - Jhootha Sach ज़रदारी जी,क्या बताएँ । नए बरस की क्या तो शुभकामनाएँ दें और किस तरह विश करें । 'आदाब' तो कहने की ज़रूरत ही नहीं क्योंकि 'दबाने' की तो आप हमेशा से ही सोचते रहे हैं । इसमें आपकी की ज्यादा गलती नहीं क्योंकि आपको परंपरा से ही यह सिद्धांत मिला है । वैसे यह... [पूरी पोस्ट]
writer joshi kavirai

ज़रदारी

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[10 Feb 2010 06:18 AM]

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