चबूतरा सिसक रहा था ...

prosing अभी हालिया के यात्रा से जो तज़रबा हुआ आप सभी के सामने है ... गलियाँ तंग हो गयींकुछ ने करवटें बदल लीकुछ थक सी गई हैंकहती हैंगाँवघना हो गया,दालान पर ताले लटक गएदादा जीनहीं रहे जब सेगोशाले का कोना ढह गया हैमगरनीम का पेड़ अब भी है बाट में ,पगडंडियाँ दूर तक... [पूरी पोस्ट]
writer "अर्श"
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[07 Mar 2010 01:22 AM]

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