बालम मोर गदेलवा....

मा पलायनम ! फागुनी रंग को और गाढ़ा करनें के लिए आज आपके सामनें एक बहुत पुराना फाग गीत प्रस्तुत कर रहाहूँ,प्रश्न-उत्तर के रूप में वर्णित पूरी रचना शुद्ध अवधी में है ,जिसमें तत्कालीन पर्यावरण का भी कितना सुंदर चित्रण दीखता है..गांव की मिट्टी की महक लिए ऐसे गीत और उसके... [पूरी पोस्ट]
writer डॉ. मनोज मिश्र
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[23 Feb 2010 03:45 AM]

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