फाग गीत-३,उलारा -न देबय कजरवा तोहके.......

मा पलायनम ! फागुनी रंग में सरोबार अपनी पिछली पोस्ट बालम मोर गदेलवा और मोहे नीको न लागे नैहरवा के क्रम में आज फाग राग की एक और विधा उलारा प्रस्तुत है.फगुआ गायन में विशेष कर चौताल ( अर्द्ध तीनताल,दादरा,कहरवाऔर फिरअर्द्ध तीनताल ) के बाद चरमोत्कर्ष पर गए जानें वाले पद... [पूरी पोस्ट]
writer डॉ. मनोज मिश्र
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[25 Feb 2010 21:56 PM]

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