अपनी जुबान के सुख
जब अंडमान की 85 साल की बुजुर्ग महिला बोआ सर की मौत की खबर पढ़ी तो यह झटका देने वाली बात थी कि हम कितने सहज तरीके से अपनी परंपरागत जुबानों की उपेक्षा करते हुए एक लालची और स्वार्थी दौड़ के शिकार हो गए हैं। पूंजी ने हमारी संवेदनाओं को खोखला कर दिया है। भाषा...
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ramkumar singh
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[22 Feb 2010 04:12 AM]



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