विश्वास और अंधविश्वास में ज़रा सा फर्क होता है.
बचपन में माँ के आंचल में छुप कर बच्चा निश्चिंत रहता है। पिता की ऊंगली पकड़ कर चलते हुए उसे कोई ड़र नहीं सताता। उसी तरह जब इंसान बड़ा हो अपने को पूरी तरह से प्रभू के आसरे छोड़ देता है तो फिर सदा के लिये भय मुक्त हो जाता है। यह विश्वास है। फसल अच्छी होगी यह...
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Gagan Sharma, Kuchh Alag sa
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[20 Feb 2010 08:44 AM]



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