विश्वास और अंधविश्वास के बीच सिर्फ एक महीन लकीर होती है.

तेताला आज के मशीनी युग में आस्था, विश्वास, चमत्कार जैसी बातें दकियानूसी लगती हैं। पर कभी-कभी कुछ ऐसा हो जाता है, जिसे आस्थावान चमत्कार और भौतिकतावादी संयोग कह कर संतुष्ट हो जाते हैं।बिना लाग-लपेट के एक सच्ची घटना बता रहा हूं। अब इसे चाहे संयोग माने चाहे अपने... [पूरी पोस्ट]
writer Gagan Sharma, Kuchh Alag sa
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[21 Feb 2010 07:42 AM]

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