प्रेम के लिए दो मिनट का मौन
कल वैलेंटाइन डे है। कुछ साल पहले जब मैं भोपाल में था तब वहां इसका ताजा-ताजा विरोध शुरू हुआ था। उन दिनों मैंने यह कविता लिखी थी। एक बार ब्लाग पर डाल चुका हूं आज दोबारा पोस्ट कर रहा हूं।फागुन के पागल महीने मेंहम चाह ही रहे थे गाना बसन्ती गीतकी आ गयानए...
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संदीप पाण्डेय
मेरी कविता
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[13 Feb 2010 04:53 AM]



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