दो चार कदम चल सकते हो

दिल-ए-नादाँ दो चार कदम चल सकते हो ,दो बातें भी कर सकते होदो दिन की है पहचान मगर ,तुम इतना तो कर सकते होदो कदम जो मेरे साथ चलोतो जान सकोगे दशा मेरीकुछ भाव मेरे , कुछ शब्द मेरेकुछ आग मेरी , कुछ व्यथा मेरीमैं चलूँगा धीरे-धीरे ताकिबातें सालो साल चलेंमुझसे भी धीरे चले... [पूरी पोस्ट]
writer संदीप पाण्डेय

पुनीत की कवितायेँ

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[02 Mar 2010 05:11 AM]

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