मुझे मौन होना है
मुझे मौन होना है तुम्हारे रूठने से नहीं,तुम्हारे मचलने से नहीं,अन्तर के कम्पनों सेसात्विक अनुराग के स्पन्दनों से । मेरा यह मौन तुम्हारी पुण्यशाली वाक्-ज्योत्सना को पीने का उपक्रम है,स्वयं को अनन्त जीवन के भव्य प्रकाश में लीन करने की...
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हिमांशु । Himanshu
कविता
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[10 Feb 2010 23:45 PM]



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