तुम क्यों उड़ जाते काग नहीं !
तुम क्यों उड़ जाते काग नहीं !व्याकुल चारा बाँटते प्रकट क्यों कर पाते अनुराग नहीं ।दायें बायें गरदन मरोड़ते गदगद पंजा चाट रहे क्या मुझे समझते वीत-राग फागुन की बायन बाँट रहे, हे श्याम बिहँग, इस कवि-मन की क्या कभी बुझेगी आग नहीं ।प्रयोग की गली में अनाड़ी...
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हिमांशु । Himanshu
कविता
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[21 Feb 2010 07:48 AM]



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