फाग-छंद ( संकलित ) - 1

सच्चा शरणम् घनानंद (राग केदारौ) फाग-रंग चढ़ गया है इन दिनों सब पर ! नदा कर चुप बैठा हूँ, ये ओरहन सुनना ठीक नहीं । अपना कौन-सा रंग है ख़ालिस कि रंगूँ उससे ! सो परिपाटी का रंग चढ़ा रहा हूँ । मेरा उद्यम इतना ही है कि जिन कवियों के नाम आप यहाँ देखेंगे, उनकी रचनाओं से... [पूरी पोस्ट]
writer हिमांशु । Himanshu

प्राचीन कवि

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[27 Feb 2010 06:46 AM]

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