मुहब्बत मानो फिर लौटी है
मुहब्बत मानो फिर लौटी हैबांहों को एक नाजुक से आगोश की आमद हैधडकनों को कुछ और धडकनों की आहट हैचाँद फिर कंगन सा हैऔर सितारे फिर आँचल सायूँ लगता है किवो मेरी उंगलियाँ ले जा करअपने हारमोनिअम पे टिका लेने वाली हैऔर मैं पिआनो की तरह बज जाने वाला हूँमैं जानता...
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ओम आर्य
आंचल
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[19 Feb 2010 01:54 AM]



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