एक बार अपने आगोश दृश्य कर दो मुझे

मौन के खाली घर मे-                                       ओम आर्य जहाँ तुम्हारी नींद हाथ रखती हैवहीँ मैं हो गया हूँ खड़ाइस उम्मीद में किआज नहीं तो कल, तेरा ख्वाब हो जाऊँगाअब जबकि सारी दुनिया ओट हो चुकी हैआवाज खींच के तुमने जो तानी है, उससेमैं बेसब्र हो रहा हूँ किकितनी जल्दी तुम झुक जाओ तानपुरे पेमुझे धुन देने के... [पूरी पोस्ट]
writer ओम आर्य

आवाज

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[21 Feb 2010 09:11 AM]

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