अच्छी चीजों का इंतज़ार कितना अच्छा होता है न !

मौन के खाली घर मे-                                       ओम आर्य वो ठीक मेरेएहसास से लग कर सोती है आजकलऔर मैंअपनी नींद में उसे देखते हुएकभी-कभी जब जाग जाते हैं मेरे एहसास उससे पहलेतो रोकता हूँ उनका उठनाताकि नाजुक नींद टिकी रहे उसकी और मैं देख सकूँ वही सब जाग करजो देखता हूँ सोते हुएउसकी नींद यूँ लगती है जैसेभीतर हीं... [पूरी पोस्ट]
writer ओम आर्य

सोना

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[25 Feb 2010 21:31 PM]

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