उस नीम के पेंड के पत्ते !

मौन के खाली घर मे-                                       ओम आर्य मैं अटक जाता हूँउस नीम के पेंड पे,जब भी कोई रंग हो,रौशनी होया फिर बसंत हो, बहार होआज भी होली पेशाम तक डोलते रहेंगे मेरी शाख पेउदासी के सफ़ेद रंग मेंसूखे हुएउस नीम के पेंड के पत्तेमैं अटक जाता हूँउस नीम के पेंड पेजो कभी गुलमोहर था... [पूरी पोस्ट]
writer ओम आर्य

शाम

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[02 Mar 2010 10:35 AM]

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