कलयुग का मसीहा !
आज के युग में कुछ ईसा बाकी हैंजो मानवता की सलीबेंअपने कंधे पर उठाये आज भी घूम रहे हैं.बगैर ये सोचे की कल क्या ये हमारे लिएसाथ होंगे?इससे बेखबरजीवन भर शक्ति भरतन-मन-धन से परोपकार करते रहे.पर वक़्त किसके साथ है?अपने वक़्त पर सबको...
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रेखा श्रीवास्तव
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[16 Feb 2010 04:00 AM]



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