कर्म करो कुछ ऐसे!
यदि नारी होतो क्या?निर्बल मत बनो,याचना के लिएकर मत उठाओ,कर्म कर उन्हेंसार्थक बनाओ ।कर्म कभी होता निष्फल नहीं,कम कभी अधिक भी देता है,जन्म लेने की यही सार्थक दिशा होगीममता का जो सागरईश्वर ने दिया हैसिक्त कर प्रेम सेखुशी कुछ चेहरों पर लाओकभी इन हाथों...
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रेखा श्रीवास्तव
sarthakta
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[20 Feb 2010 03:12 AM]



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