महिला दिवस का शतक
एक शतक ये भी बना,क्या सुलझी है सौ गुत्थियाँ भी?शायद नहीं?इसको हमने कब जाना?जानकर भी कभी अपना हक़ ही माना,शायद नहीं?संकल्प लिए गए,कर्म से जूझे भी,कभी गिरे उठे भी,परहम अभी भीसबको दिशा नहीं दे पाएउन्हें मुक्त नहीं करा पाएउन्हें...
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रेखा श्रीवास्तव
daayitva
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[08 Mar 2010 03:41 AM]



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