पतंजलि योग दर्शन-सवितर्क और निर्वितर्क समाधि (patanjali yog darshan-samadhi)
तत्र शब्दार्थज्ञानविकल्पैः संकीर्णा सवितर्का समापत्ति।।हिन्दी में भावार्थ-यह समाधि की प्रारंभिक अवस्था है जिसमें मनुष्य का ध्यान सासंरिक विषयों से पृथक तो हो जाता है पर शब्द, अर्थ और ज्ञान का आभास कहीं ने कहीं उसके मस्तिष्क में बना रहता है। इसे...
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दीपक भारतदीप
ध्यान
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[13 Feb 2010 00:34 AM]



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