कौटिल्य दर्शन-निंदा रहित मनुष्य देवता समान

शब्दयोग सारथी-पत्रिका स्वभावेन हरेन्मित्रं सद्भावेन व बान्धवान्।स्त्रीभृत्यान् प्रेमदानाभ्यां दाक्षिण्येनेतरं जनम्।।हिन्दी में भावार्थ-स्वभाव से मित्र, सद्भाव स बंधुजन, प्रेमदान से स्त्री और भृत्यों को चतुराई से वश में करें।ये प्रियाणि प्रभाषन्ते प्रयच्छन्ति च... [पूरी पोस्ट]
writer दीपक भारतदीप

आध्यात्म

views
6
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
0
[20 Feb 2010 23:25 PM]

Free Vedic Astrology From Astrobix